बच्चो के लिए शिक्षाप्रद कहानिया – Short Moral Stories in Hindi

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Short Moral Stories in Hindi – हेलो दोस्तों हम लाए हैं यहां पर बहुत अच्छी बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानियां (hindi stories for kids) जिससे बच्चों का मानसिक विकास अच्छा होगा और उन्हें अच्छी बातों का ज्ञान होगा-

1मुसीबत में रिश्ते ही काम आते हैं 

कहानी के पात्र

  1. दो शेर

एक बार दो शेरों की दोस्ती बिगड़ जाती है, दोनों ही एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं और एक दूसरे से 10 साल तक बात नहीं करते।

एक दिन पहले शेर और उसकी बीवी बच्चों को 25-30 कुत्ते मिलकर नोचने लगते हैं ।

तभी दूसरा शेर अचानक आ जाता है और उन कुत्तों को केले के छिलके की तरफ और फाड़ के भगा देता है । और फिर से दूर जाकर बैठ जाता है ।

यह देखकर पहले शहर का बेटा उससे पूछता है कि – पापा दूसरे शहर से तो आप बात तक नहीं करते, फिर भी उसने हमको क्यों बचाया?

इस पर पहला शेर बोलता है कि – बेटा, भले ही नाराजगी हो पर दोस्ती इतनी भी कमजोर नहीं होनी चाहिए कि कुत्ते भी फायदा उठा ले।

कहानी से सीख

परिवार में भले ही आपस में कितनी भी लड़ाई झगड़े होते हो, पर इसका फायदा कभी परायो को नहीं देना चाहिए। अनबन, विचारों की होनी चाहिए रिश्तो की नहीं ।

2 मूर्ख मित्र की अपेक्षा विद्वान्‌ शत्रु ज्यादा अच्छा होता है।

कहानी के पात्र

  1. धनवान सेठ
  2. मूर्ख बंदर

किसी बहुत  धनवान सेठ के घर पर एक बन्दर सेवक के रुप में रहता था । वह  सेठ का बहुत विश्वास-पात्र और भक्त था । 

वह घर पर कहीं भी  बेरोक-टोक जा सकता था ।एक दिन जब सेठ सो रहा था तो बन्दर पंखे से हवा दे रहा था । एक मक्खी बार-बार सेठ की छाती पर बैठ जाती थी ।

 पंखे से बार-बार हटाने पर भी वह मानती नहीं थी, उड़कर फिर वहीं बैठी जाती थी ।

बन्दर को क्रोध आ गया । उसने पंखा छोड़ कर हाथ में तलवार ले ली, और इस बार जब मक्खी सेठ की छाती पर बैठी तो उसने पूरे बल से मक्खी पर तलवार दे मारी । 

मक्खी तो उड़ गई, किन्तु सेठ की छाती के तलवार की चोट से दो टुकडे़ हो गई । उसने वहीं दम तोड़ दिया

कहानी से सीख –

“मूर्ख मित्र की अपेक्षा विद्वान्‌ शत्रु ज्यादा अच्छा होता है।”

3 किसी अजनबी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर ही उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।

कहानी के पात्र

  1. कविश मुनि साधु
  2. राघव ठग

एक बार की बात है, किसी गाँव के मंदिर में कविश मुनि नाम का एक प्रतिष्ठित साधू रहता था। गांव में सभी लोग उनका सम्मान करते थे। उसे अपने भक्तों से दान में तरह- तरह के वस्त्र, उपहार, खाद्य सामग्री और पैसे मिलते थे। 

उन वस्त्रों को बेचकर साधू ने काफी धन जमा कर लिया था।

साधू कभी किसी पर विश्वास नहीं करता था और हमेशा अपने धन की सुरक्षा के लिए चिंतित रहता था। वह अपने धन को एक पोटली में रखता था और उसे हमेशा अपने साथ लेकर ही चलता था।

उसी गाँव में एक राघव नाम का ठग रहता था। बहुत दिनों से उसकी नजर साधू के धन पर थी। 

ठग हमेशा साधू का पीछा किया करता था, लेकिन साधू उस गठरी को कभी अपने से अलग नहीं होने देता।

आखिरकार, उस ठग ने एक छात्र का वेश धारण किया और उस साधू के पास गया। 

उसने साधू से मिन्नत की कि वह उसे अपना शिष्य बना ले क्योंकि वह ज्ञान प्राप्त करना चाहता था। 

साधू तैयार हो गया और इस तरह से वह ठग साधू के साथ ही मंदिर में रहने लगा।

ठग मंदिर की साफ सफाई से लेकर अन्य सभी कार्य भी करता था और ठग ने साधू की खूब सेवा की और जल्दी ही उसका विश्वासपात्र बन गया।

Short Moral Stories in Hindi

एक दिन साधू को पास के गांव में एक अनुष्ठान के लिए आमंत्रित किया गया, 

साधू ने वह आमंत्रण स्वीकार किया और निश्चित दिन साधू अपने शिष्य के साथ अनुष्ठान में भाग लेने के लिए निकल पड़ा।

रास्ते में एक नदी पड़ी और साधू ने स्नान करने की इच्छा व्यक्त की।

 उसने पैसों की गठरी को एक कम्बल के भीतर रखा और उसे नदी के किनारे रख दिया।

 उसने ठग से सामान की रखवाली करने को कहा और खुद नहाने चला गया। ठग को तो कब से इसी पल का इंतज़ार था। 

जैसे ही साधू नदी में डुबकी लगाने गया, वह रुपयों की गठरी लेकर चम्पत हो गया।

 कहानी से सीख –

किसी अजनबी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर ही उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।

4 बिना मांगे किसी को भी सलाह नहीं देनी चाहिए – Short Moral Stories in Hindi

कहानी के पात्र

  1. चिड़िया
  2. बन्दर

एक जंगल में एक पेड़ पर गौरैया का घोंसला था। एक दिन कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। 

ठंड से कांपते हुए तीन चार बंदरो ने उसी पेड़ के नीचे आश्रय लिया।

एक बंदर बोला “कहीं से आग तापने को मिले तो ठंड दूर हो सकती हैं।”

दूसरे बंदर ने सुझाया “देखो, यहां कितनी सूखी पत्तियां गिरी पड़ी हैं। 

इन्हें इकट्ठा कर हम ढेर लगाते हैं और फिर उसे सुलगाने का उपाय सोचते हैं।”

बंदरों ने सूखी पत्तियों का ढेर बनाया और फिर गोल दायरे में बैठकर सोचने लगे कि ढेर को कैसे सुलगाया जाए।

तभी एक बंदर की नजर दूर हवा में उड़ते एक जुगनू पर पड़ी और वह उछल पड़ा।

उधर ही दौड़ता हुआ चिल्लाने लगा “देखो, हवा में चिंगारी उड़ रही हैं।

 इसे पकड़कर ढेर के नीचे रखकर फूंक मारने से आग सुलग जाएगी।”

“हां हां!” कहते हुए बाकी बंदर भी उधर दौड़ने लगे।

 पेड़ पर अपने घोंसले में बैठी गौरैया यह सब देख रही थे। 

उससे चुप नहीं रहा गया। वह बोली ” बंदर भाइयो, यह चिंगारी नहीं हैं यह तो जुगनू हैं।”

एक बंदर क्रोध से गौरैया की देखकर गुर्राया “मूर्ख चिड़िया, चुपचाप घोंसले में दुबकी रह।हमें सिखाने चली है।”

Short Moral Stories in Hindi

इस बीच एक बंदर उछलकर जुगनू को अपनी हथेलियों के बीच कटोरा बनाकर कैद करने में सफल हो गया।

 जुगनू को ढेर के नीचे रख दिया गया और सारे बंदर लगे चारों ओर से ढेर में फूंक मारने।

गौरैया ने सलाह दी “भाइयो! आप लोग गलती कर रहे हैं। 

जुगनू से आग नहीं सुलगेगी। दो पत्थरों को टकराकर उससे चिंगारी पैदा करके आग सुलगाइए।”

 बंदरों ने गौरैया को घूरा। 

आग नहीं सुलगी तो गौरैया फिर बोल उठी “भाइयो! आप मेरी सलाह मानिए, कम से कम दो सूखी लकड़ियों को आपस में रगड़कर देखिए।”

सारे बंदर आग न सुलगा पाने के कारण खीजे हुए थे। 

एक बंदर क्रोध से भरकर आगे बढ़ा और उसने गौरैया पकड़कर जोर से पेड़ के तने पर मारा। गौरैया फड़फड़ाती हुई नीचे गिरी और मर गई।

 कहानी से सीख –

  • बिना मांगे किसी को भी सलाह नहीं देनी चाहिए, खासकर मूर्ख व्यक्ति को तो बिलकुल भी नहीं।
  • मूर्खों को सीख या सलाह देने का कोई लाभ नहीं होता। उल्टे सीख देने वाले को ही पछताना पड़ता हैं।

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